वर्णी संस्थान विकास सभा कार्यकारिणी

# पद का नाम नाम सम्प्रति कार्यरत
1 मंगल आशीर्वाद एवं स्थापना वर्णी विद्यालय रत्न परम पूज्य 108 आचार्य सुनील सागर जी महाराज के मंगल सांन्निध्य एवं निर्देशन में
भट्टारक जी की नसियाँ जयपुर में वर्णी विद्यालय गौरव परम पूज्य 108 आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज
वर्णी विद्यालय गौरव पूज्य 108 मुनि श्री मार्दव सागर जी महाराज
स्वस्ति श्री चारु कीर्ति जी भट्टारक श्रवणबेलगोला
2 परम संरक्षक आदरणीय श्री सुरेश चंद जी जैन (आईएएस)
डॉ भागचंद जी भास्कर
डॉ भागचंद जी भागेंदु
ब्र. श्री जिनेश शास्त्री जी जबलपुर
डॉ श्री क्रांतिकुमार जी सराफ
3 संरक्षक पं राजकुमार शास्त्री , सतना
पं ज्ञान चंद जी शास्त्री , प्राचार्य
श्री नन्हे भाई जी शास्त्री
पंडित विजय कुमार शास्त्री जी
श्री जीवंधर जी शास्त्री ,जबलपुर
4 परामर्श मंडल ब्र. डी. राकेश जी ब्र. डॉ धर्मेन्द्र जैन , जयपुर
ब्र. विनोद जी, छतरपुर
डॉ श्री कमल शास्त्री मानकी पुणे
श्री राजकुमार शास्त्री ,सागर
पं शीतलचंद्र जैन , सागर
पं खेमचंद्र जैन
पं जयंत जी , सीकर
पं कोमलचंद्र लोहारिया
पं उदयचन्द्र जी शास्त्री , सागर
पं आनंद जैन शास्त्री , सागर
श्री आनंद शास्त्री जसोदा
प्रतिष्ठाचार्य पं श्री ऋषभ शास्त्री कोलकाता प्रतिष्ठाचार्य डॉ आनंद प्रकाश शास्त्री दलपतपुर
पं उत्तमचंद्र शास्त्री, सागर
ब्र. विनय भैया , उदयपुर
डॉ आशा जैन
डॉ पी.सी. जैन , सागर
पं राकेश कुमार जैन, सागर
डॉ राजेश जैन
वरिष्ठ विद्वान
प्रतिष्ठाचार्य / विद्वान
प्रतिष्ठाचार्य / विद्वान
प्राचार्य / विद्वान
प्रतिष्ठाचार्य / विद्वान
5 अध्यक्ष पंडित डॉ हरिश्चचन्द्र शास्त्री जी साहित्याचार्य पूर्व प्राचार्य श्री गोपालदास दिगंबर जैन संस्कृत महाविद्यालय, मुरैना
6 कार्याध्यक्ष श्री संजय शास्त्री, ढाना वरिष्ठ समाजसेवी
7 उपाध्यक्ष श्री दीपचंद जी शास्त्री,भोपाल
डॉ अरविंद जी शास्त्री सुनवाहा, इंदौर
श्री प्रकाश शास्त्री, सागोनी
श्री सुरेश शास्त्री केवलारी जी
श्री विनोद शास्त्री, बम्होरी , सागर
श्री मनोज जी शास्त्री, बेगमगंज
प्रशासनिक अधिकारी विद्वान
प्रशासनिक अधिकारी विद्वान
प्रशासनिक अधिकारी विद्वान
श्रेष्ठी विद्वान
श्रेष्ठी विद्वान
श्रेष्ठी विद्वान
8 महामंत्री श्री त्रिलोक चंद्र शास्त्री, बडागांव प्रबंधक त्रिलोक तीर्थ संस्थान, बड़ागांव, दिल्ली
9 मुख्य संयोजक श्री चन्द्रेश शास्त्री (भारतीय डाक सेवा) प्रवर अधीक्षक डाकघर, ग्वालियर संभाग
10 कोषाध्यक्ष श्री राजेंद्र शास्त्री, दलपतपुर, सागर वरिष्ठ श्रेष्ठी
11 संयुक्त मंत्री भाई श्री आनंदी लाल जी शास्त्री, बांसबाड़ा शासकीय व्याखाता विद्वान
12 संगठन मंत्री श्री राजेंद्र शास्त्री नैनागिर, बैतूल
श्री मनोज शास्त्री खामखेडा
शासकीय अधिकारी
शासकीय व्याखाता विद्वान
13 सह संयोजक श्री राज कुमार शास्त्री, जबलपुर
श्री अखिलेश शास्त्री, रमगढ़ा
14 प्रबंध संयोजक श्री कमलेश शास्त्री, जेरा
पं राजकुमार शास्त्री , कर्द, सागर
श्रेष्ठी विद्वान
15 सह संगठन मंत्री श्री विनय शास्त्री बम्होरी
श्री राजेश जी वर्तमान गृह प्रबंधक मोराजी
16 सह कोषाध्यक्ष श्री संजय शास्त्री पावला, दिल्ली
पं सुरेश शास्त्री, सागर
17 संस्कृति मंत्री श्री संजय शास्त्री , तिगोड़ा , सागर
श्री विमलेंद्र नैनागिर, भोपाल
18 कार्यकारिणी सदस्य श्री श्रवण शास्त्री मढ़ावरा
श्री वीरेंद्र जी शास्त्री
श्री शीतलचंद शास्त्री ,मानकी
श्री कैलाश शास्त्री टीला
श्री श्रीकांत जसोड़ा
श्री अशोक शास्त्री, रजपुरा
श्री कमल कुमार शास्त्री तेंदुखेडा
श्री रमेश चंद जी शास्त्री समर्रा
श्री मोहन जी शास्त्री इंदौर
श्री सुनील शास्त्री केवलारी
श्री कमल शास्त्री दलपतपुर
श्री राकेश शास्त्री केवलारी
श्री प्रेमचंद शास्त्री दलपतपुर
ब्र. डॉ धर्मेन्द्र शास्त्री दिल्ली
श्री भागचंद शास्त्री जी धारियाबाद
श्री अरविन्द शास्त्री जी बमाना
पं करोड़ी लाल जी शास्त्री
पं सुवोध ककड़ारी
पं अमर शास्त्री , अजनौर
पं दीपक शास्त्री, बम्होरी
पं रानू सिल्चर
पं अजय सरखड़ी
पं अशोक शास्त्री , बम्होरी
पं सुनील शास्त्री , नैनधरा
पं देवेन्द्र सौंरई
पं विनोद सौंरई
श्री सुनील ढाना, सागर
पं दीपक शास्त्री , कृष्णा नगर , दिल्ली
प्रतिष्ठाचार्य / विद्वान
प्रतिष्ठाचार्य / विद्वान
प्रतिष्ठाचार्य / विद्वान
प्रतिष्ठाचार्य / विद्वान
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प्रतिष्ठाचार्य / विद्वान
प्रतिष्ठाचार्य / विद्वान
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प्रतिष्ठाचार्य / विद्वान
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वाणी संथान विकास सभा ब्लॉग

युगदृष्‍टा गणेश प्रसाद जी वर्णी की 150 वीं जन्म जयंती

जैन शैक्षणिक जगत के उगते हुए सूर्य की भांति अपने ज्ञान की शीतल किरणों से पूरी जैन समाज के युवक और युवतियों को शिक्षित और प्रशिक्षित कर वर्णी जी पूरे देश की शैक्षणिक क्रांति के सूत्रधार बन गए है। उनकी सहज, सरल और निष्कपट वाणी ने जन-जन का उद्धार किया है। जैन तीर्थ, नैनागिरि से वर्णी जी की अनूठी शुरूआत ने पूरी दुनिया को चकित कर दिया। उन्‍नीसवीं शताब्दि के अंतिम दशक एवं बीसवीं शताब्दि के पूर्वार्द्ध की अवधि 1901-1953 में वर्णी जी ने नैनागिरि की अनेकों यात्राऐं की। उन्‍होंने लंबी-लंबी अवधि तक भगवान पार्श्‍वनाथ समवसरण क्षेत्र में रहकर अपरिमित ऊर्जा प्राप्‍त की। पूज्‍यपाद गुरूदेव ने नैनागिरि में प्राचीनतम धर्मशाला का वर्ष 1917 में शिलान्यास और 1918 में उद्घाटन कर एक वर्ष में ही निर्माण पूर्ण कराया। वर्ष 1935 में नैनागिरि में पाठशाला के विशाल पक्‍के भवन (मलैया धर्मशाला) का निर्माण कराया। इस विद्यालय में संचालित बाबा दौलतराम वर्णी जैन पाठशाला को सतत संपोषित किया।


नैनागिरि में गत दशक में विशाल वर्णी सभागार का निर्माण कर हम सब शिष्‍यों-प्रशिष्‍यों ने अपने परम कुल गुरू के चरणों में श्रद्धा -सुमन समर्पित करने का आनंद लिया है।

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हमें 1945 से शिशु और किशोर के रूप में उनका सतत स्‍नेह प्राप्‍त करने और उनके द्वारा संस्‍थापित श्री गणेश प्रसाद वर्णी दिगंबर जैन महाविद्यालय, सागर में 8 वर्ष अध्‍ययन करने का सौभाग्‍य प्राप्‍त हुआ है। हमारी पत्नि न्‍यायमूर्ति विमला जी ने भी उनके द्वारा संस्‍थापित जैन महिलाश्रम, सागर में शिक्षण प्राप्‍त किया है।


पूज्‍य गुरूदेव ने स्वतंत्रता संग्राम में अपना अनुपम योगदान प्रदान किया। उनके आडंबर विहीन क्षुल्लक जीवन ने साधु की गरिमा स्थापित की। उनकी विनम्रता, सादगी और सहिष्णुता से प्रभावित होकर बुन्देलखण्ड के प्रत्येक व्यक्ति ने उन्हें ऊपर उठाकर ज्ञान और आचरण की सर्वोच्च सीढ़ियों पर विराजमान कर दिया। उनकी 150 वीं जन्‍म जयंती पर सिंघई सतीशचन्‍द्र केशरदेवी जैन जनकल्‍याण संस्‍थान द्वारा अपने नैनागिरि और तिन्‍सी पब्लिक स्‍कूल्स में 13 सितम्‍बर, 2022 से पूरे वर्ष भर प्रतिदिन छोटा सा दीप जलाकर उनकी ज्ञान ज्‍योति को सतत रूप से प्रज्‍जवलित किया जा रहा है।


हमारा यह परम सौभाग्‍य है कि हमारे गुरूणांगुरू गणेश प्रसाद जी वर्णी की 150 वीं जन्‍म जयंती के अवसर पर वर्णी संस्‍थान विकास सभा द्वारा युगदृष्‍टा शीर्षक से प्रकाशित यह स्‍मारिका, हमारे कुछ शब्‍द -प्रसून पाठकों तक पहुँचा रही है।