युगदृष्‍टा गणेश प्रसाद जी वर्णी की 150 वीं जन्म जयंती

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जैन शैक्षणिक जगत के उगते हुए सूर्य की भांति अपने ज्ञान की शीतल किरणों से पूरी जैन समाज के युवक और युवतियों को शिक्षित और प्रशिक्षित कर वर्णी जी पूरे देश की शैक्षणिक क्रांति के सूत्रधार बन गए है। उनकी सहज, सरल और निष्कपट वाणी ने जन-जन का उद्धार किया है। जैन तीर्थ, नैनागिरि से वर्णी जी की अनूठी शुरूआत ने पूरी दुनिया को चकित कर दिया। उन्‍नीसवीं शताब्दि के अंतिम दशक एवं बीसवीं शताब्दि के पूर्वार्द्ध की अवधि 1901-1953 में वर्णी जी ने नैनागिरि की अनेकों यात्राऐं की।


उन्‍होंने लंबी-लंबी अवधि तक भगवान पार्श्‍वनाथ समवसरण क्षेत्र में रहकर अपरिमित ऊर्जा प्राप्‍त की। पूज्‍यपाद गुरूदेव ने नैनागिरि में प्राचीनतम धर्मशाला का वर्ष 1917 में शिलान्यास और 1918 में उद्घाटन कर एक वर्ष में ही निर्माण पूर्ण कराया। वर्ष 1935 में नैनागिरि में पाठशाला के विशाल पक्‍के भवन (मलैया धर्मशाला) का निर्माण कराया। इस विद्यालय में संचालित बाबा दौलतराम वर्णी जैन पाठशाला को सतत संपोषित किया।


नैनागिरि में गत दशक में विशाल वर्णी सभागार का निर्माण कर हम सब शिष्‍यों-प्रशिष्‍यों ने अपने परम कुल गुरू के चरणों में श्रद्धा -सुमन समर्पित करने का आनंद लिया है।

हमें 1945 से शिशु और किशोर के रूप में उनका सतत स्‍नेह प्राप्‍त करने और उनके द्वारा संस्‍थापित श्री गणेश प्रसाद वर्णी दिगंबर जैन महाविद्यालय, सागर में 8 वर्ष अध्‍ययन करने का सौभाग्‍य प्राप्‍त हुआ है। हमारी पत्नि न्‍यायमूर्ति विमला जी ने भी उनके द्वारा संस्‍थापित जैन महिलाश्रम, सागर में शिक्षण प्राप्‍त किया है।


पूज्‍य गुरूदेव ने स्वतंत्रता संग्राम में अपना अनुपम योगदान प्रदान किया। उनके आडंबर विहीन क्षुल्लक जीवन ने साधु की गरिमा स्थापित की। उनकी विनम्रता, सादगी और सहिष्णुता से प्रभावित होकर बुन्देलखण्ड के प्रत्येक व्यक्ति ने उन्हें ऊपर उठाकर ज्ञान और आचरण की सर्वोच्च सीढ़ियों पर विराजमान कर दिया। उनकी 150 वीं जन्‍म जयंती पर सिंघई सतीशचन्‍द्र केशरदेवी जैन जनकल्‍याण संस्‍थान द्वारा अपने नैनागिरि और तिन्‍सी पब्लिक स्‍कूल्स में 13 सितम्‍बर, 2022 से पूरे वर्ष भर प्रतिदिन छोटा सा दीप जलाकर उनकी ज्ञान ज्‍योति को सतत रूप से प्रज्‍जवलित किया जा रहा है।


हमारा यह परम सौभाग्‍य है कि हमारे गुरूणांगुरू गणेश प्रसाद जी वर्णी की 150 वीं जन्‍म जयंती के अवसर पर वर्णी संस्‍थान विकास सभा द्वारा युगदृष्‍टा शीर्षक से प्रकाशित यह स्‍मारिका, हमारे कुछ शब्‍द -प्रसून पाठकों तक पहुँचा रही है।

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